क्यूँ ये बैरी मन..
किसी को इतना याद करता है
उसकी मीठी सी आवाज़ सुनने को
क्यूँ ये हर पल तड़पता है
क्यूँ नैयनों से मेरे
तू हो गयी ओझिल
थम सा गया है समां
हर साँस है मेरी बोझिल
काटे कटे ना ये रातें
बिताये बीते ना ये दिन
कैसे धीर धरूँ मैं
तू ही बता, तेरे बिन.....

beautiful ....man ki baat ko shabdo mein dhaal diya hai....samay sabse aachaa merham hai..luv
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