Tuesday, February 2, 2010

बंजारे


दिन बंजारे कब लौटे हैं
कब हुए किसी के बैरागी पल
जीवन में तेरा आना शायद जाने को था
सो चला गया....
मत पूछो कितना हम रोयेंगे
मत पूछो कितना हम तड़पेंगे
चाँदी सी लहरों पर जब-जब
किरण हँसेगी संध्या की
नहीं पूछना इस साहिल से
गुमसुम क्यों हो
फूलों के गालों से जब-जब
कोई शबनम ढूलकेगी
नहीं पूछना तुम पतझढ़ से
रोते क्यों हो
कुंठित मन
घायल अभिलाषा
टूटे सपनो की अर्थी ले
किन मोढ़ो पर रुक जायेंगे हम
तुम चिंता मत करना
तुमसे शिकवा नहीं हे साथी
तुमने तो दी हे
प्रीत मुझे
जाने क्यों भूल गयी में
भंवरा तो मंडराता ही हे
कलियों पे.........


MARCH 12' 1992

1 comment:

  1. You have a very good article about reflection and it helped me so much. Thanks for sharing this to us especially to me who followed your everyday write ups.

    janine

    www.n8fan.net

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